आस्था के आगे पहाड़ भी नतमस्तक: कुल्लू में खड़ी पहाड़ी पर रस्सी के सहारे निकला बिजली महादेव का रथ

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हिमाचल प्रदेश में कुल्लू घाटी के आराध्य देव बिजली महादेव की वार्षिक परिक्रमा को लेकर क्षेत्र में आस्था और उत्साह का माहौल है। देवता ने मंगलवार को अपने देवालय से रथ पर सवार होकर परिक्रमा के लिए प्रस्थान किया। देव रथ को खड़े पहाड़ से रस्सी के सहारे गांव तक पहुंचाया गया। इस धार्मिक यात्रा का पहला पड़ाव जिया गांव रहेगा, जहां देवता का भव्य स्वागत किया जाएगा।

देवता बिजली महादेव का रात्रि ठहराव भ्रैंण गांव में होगा। यहां पर परंपरागत रूप से बिरशु मेले का आयोजन किया जाएगा, जिसमें स्थानीय लोग बड़ी संख्या में भाग लेते हैं। बैसाख माह में होने वाली यह परिक्रमा विशेष धार्मिक महत्व रखती है और इसे क्षेत्र की समृद्ध परंपरा का प्रतीक माना जाता है।

भ्रैंण से जिया गांव तक का मार्ग सीधी पहाड़ी व चढ़ाई वाला है, जो काफी दुर्गम और जोखिम भरा माना जाता है। इस कठिन रास्ते से देवता के रथ को ले जाना आसान नहीं होता। ऐसे में परंपरा के अनुसार रस्सों की मदद से देव रथ को जिया गांव तक पहुंचाया गया। यह दृश्य श्रद्धालुओं के लिए आस्था और रोमांच का अद्भुत संगम होता है।

जिया निवासी एवं पूर्व पंचायत प्रधान संजू पंडित ने बताया कि बैसाख संक्रांति के अवसर पर देवता हर वर्ष गांव पहुंचते हैं, जिसका ग्रामीणों को बेसब्री से इंतजार रहता है। उन्होंने कहा कि इस बार भी गांव में देवता के स्वागत के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। देवता के आगमन पर जिया गांव में तीन दिनों तक भव्य मेले का आयोजन होगा।

इस दौरान पारंपरिक कार्यक्रमों के साथ-साथ महिलाएं नृत्य करेंगी, जो क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत का अहम हिस्सा है। श्रद्धालु फूलमालाओं के साथ देवता का स्वागत करेंगे और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त करेंगे। पूरे क्षेत्र में देव परिक्रमा को लेकर भक्तिमय वातावरण बना हुआ है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस धार्मिक यात्रा में शामिल होने के लिए उत्साहित हैं।

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