करनाल बस स्टैंड पर आग का कहर: हरियाणा रोडवेज की तीन बसें जलीं, सुरक्षा इंतजामों पर सवाल

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हरियाणा के करनाल के बस स्टैंड पर शुक्रवार की रात उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब यहां खड़ी हरियाणा रोडवेज की बसों में अचानक भीषण आग लग गई। रात करीब 10:30 बजे लगी इस आग ने चंद मिनटों में ही विकराल रूप धारण कर लिया और एक के बाद एक तीन बसों को अपनी चपेट में ले लिया। इस हादसे में 2024 मॉडल की एक नई बस पूरी तरह जल गई, जबकि दो अन्य बसों को आंशिक रूप से नुकसान पहुंचा है।

प्रत्यक्षदर्शियों और रोडवेज कर्मचारियों के अनुसार हादसा रात के वक्त तब हुआ जब बसें अपने निर्धारित स्टैंड पर खड़ी थीं। रोडवेज कर्मी राकेश शर्मा ने बताया कि सबसे पहले बस नंबर 45 जीवी 9460 से धुआं निकलता दिखाई दिया। इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता, आग की लपटों ने बस को पूरी तरह घेर लिया।
भीषण गर्मी और हवा के कारण आग तेजी से फैली और पास खड़ी दो अन्य बसों तक पहुंच गई। गनीमत यह रही कि दमकल विभाग को तुरंत सूचना दी गई, जिसके बाद फायर ब्रिगेड की 4 गाड़ियों ने मौके पर पहुंचकर मोर्चा संभाला। कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया, जिससे दो बसों को ज्यादा नुकसान होने से बचा लिया गया।

हादसे के कारणों को लेकर प्राथमिक तौर पर बिजली के ‘शॉर्ट सर्किट’ को जिम्मेदार माना जा रहा है। रोडवेज सुपरवाइजर सुशील कुमार ने बताया कि वे उस वक्त ड्यूटी पर ही तैनात थे। जैसे ही उन्हें सूचना मिली, उन्होंने तुरंत आसपास खड़ी अन्य गाड़ियों को वहां से हटवाया ताकि नुकसान को कम किया जा सके।
सुशील कुमार के मुताबिक आग लगने की असल वजह तकनीकी खामी हो सकती है, लेकिन विभाग हर पहलू से मामले की बारीकी से तफ्तीश कर रहा है। फॉरेंसिक टीम की मदद से भी साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं ताकि स्पष्ट हो सके कि आग अचानक लगी या इसके पीछे कोई मानवीय चूक थी।

इस अग्निकांड ने बस स्टैंड की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। सवाल यह उठ रहा है कि जब डिपो और स्टैंड पर 24 घंटे कर्मचारियों की तैनाती रहती है, तो इतनी बड़ी घटना की भनक समय रहते क्यों नहीं लगी? स्थानीय लोगों और कर्मचारियों का मानना है कि यदि अग्निशमन उपकरणों का समय पर उपयोग होता और निगरानी चुस्त होती, तो एक नई बस को जलने से बचाया जा सकता था।

करनाल डिपो पहले ही बसों की किल्लत से जूझ रहा है। वर्तमान में यहां के बेड़े में लगभग 120 बसें हैं, जबकि सुचारु परिवहन व्यवस्था के लिए 40 से अधिक अतिरिक्त बसों की तत्काल आवश्यकता है। ऐसे में एक नई (2024 मॉडल) बस का पूरी तरह नष्ट होना विभाग के लिए किसी बड़े आर्थिक और परिचालन झटके से कम नहीं है। इस घटना के बाद यात्रियों की सुविधा पर भी असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।

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