अस्पताल और स्कूलों को पहले मिलेगा कमर्शियल गैस सिलेंडर, उत्तराखंड में LPG को लेकर सरकार का बड़ा फैसला

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पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच गैस सप्लाई प्रभावित होने की आशंकाओं को देखते हुए उत्तराखंड सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। राज्य में अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों को कमर्शियल एलपीजी गैस सिलेंडर प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराया जाएगा। हालांकि सरकार ने यह भी साफ किया है राज्य में फिलहाल गैस सिलेंडरों की कोई कमी नहीं है। सरकार ने जरूरत पड़ने पर कमर्शियल इस्तेमाल के लिए लकड़ी देने की तैयारी भी शुरू कर दी है, लेकिन कहा कि राज्य में गैस सिलेंडर की कोई कमी नहीं है।

राज्य के चीफ सेक्रेटरी आनंद बर्धन ने राज्य की समर कैपिटल गैरसैंण में एक रिव्यू मीटिंग की, जिसमें सभी जिलों के अधिकारी और तेल और गैस कंपनियों के स्टेट-लेवल कोऑर्डिनेटर वीडियो कॉन्फ्रेंस के ज़रिए मीटिंग में शामिल हुए। एक सरकारी रिलीज के मुताबिक, मीटिंग में अस्पतालों और एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन को कमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई को प्रायोरिटी देने का फैसला किया गया।

मीटिंग में यह तय किया गया कि फिलहाल, ज़रूरी सेवाओं में किसी भी रुकावट से बचने के लिए होटल, ढाबों और दूसरी कमर्शियल जगहों को सिलेंडर की सप्लाई सीमित रहेगी। चीफ सेक्रेटरी ने साफ किया कि राज्य में घरेलू गैस सिलेंडर काफी मात्रा में मौजूद हैं और किसी भी तरह की कोई कमी नहीं है। बर्धन ने गैस सिलेंडर की ब्लैक मार्केटिंग और गैर-कानूनी स्टोरेज पर सख्ती से रोक लगाने और जिलों में रेगुलर रेड करने का निर्देश दिया। उन्होंने तहसील लेवल पर सब-डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट की अगुवाई में क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRTs) बनाने को भी कहा। चीफ सेक्रेटरी ने अधिकारियों से जिलों में काम कर रही तेल कंपनियों और गैस एजेंसियों के साथ लगातार कोऑर्डिनेशन बनाए रखने को भी कहा।

इंडियन ऑयल के स्टेट-लेवल कोऑर्डिनेटर, कृष्ण कुमार गुप्ता और स्वर्ण सिंह ने मीटिंग में अधिकारियों को बताया कि राज्य में घरेलू गैस सिलेंडर काफी मात्रा में मौजूद हैं और फिलहाल कोई कमी नहीं है। बर्धन ने कहा कि कुछ लोग गैस सिलेंडर की कमी की अफवाह फैलाने की कोशिश कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह के “गुमराह करने वाले प्रोपेगैंडा” को सोशल मीडिया और दूसरे प्लेटफॉर्म पर फैलने से रोका जाना चाहिए, और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

राज्य सरकार ने संभावित गैस संकट से निपटने के लिए एक वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर कमर्शियल इस्तेमाल के लिए लकड़ी देने की तैयारी शुरू कर दी है। वन मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि मौजूदा ग्लोबल हालात को देखते हुए LPG सप्लाई में कमी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि इस स्थिति से निपटने के लिए उत्तराखंड फॉरेस्ट डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन को लकड़ी की उपलब्धता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है, ताकि ज़रूरत पड़ने पर कमर्शियल कामों के लिए इसे दूसरे फ्यूल के तौर पर इस्तेमाल किया जा सके।

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