T20 वर्ल्ड कप: आज जिम्बाब्वे के खिलाफ मुकाबले में उतरेगा भारत
आंकड़े बताते हैं कि इस वर्ल्ड कप में चेपॉक (Chepauk) का मैदान बल्लेबाजों के लिए स्वर्ग साबित हुआ है। लेकिन हालात बता रहे हैं कि भारत अब कोई भी गलती करने का जोखिम नहीं उठा सकता। गुरुवार को जब चेन्नई में भारत और जिम्बाब्वे आमने-सामने होंगे, तो यह केवल ग्रुप-स्टेज का कोई आम मैच नहीं होगा। यह मुकाबला तय करेगा कि भारत का टी20 वर्ल्ड कप का सफर आगे बढ़ेगा या यहीं खत्म हो जाएगा।
हो सकता है कि टॉस होने तक भारत की किस्मत पूरी तरह से उसके अपने हाथों में न रहे। दिन की शुरुआत में होने वाला वेस्टइंडीज बनाम दक्षिण अफ्रीका का मुकाबला गणितीय रूप से भारत की नॉकआउट की राह को मुश्किल कर सकता है—या पूरी तरह से बंद भी कर सकता है। इस अहम मैच पर इस असहज सच्चाई का साया मंडरा रहा है।
अहमदाबाद में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 76 रनों की करारी हार ने गहरे जख्म दिए हैं। सम्मान के अलावा, इस हार ने भारत के नेट रन रेट (NRR) को भी काफी नुकसान पहुंचाया है। इसने टीम को ऐसी स्थिति में धकेल दिया है जहां अब जीत के साथ-साथ हार-जीत का अंतर भी बहुत मायने रखता है।
दिलचस्प बात यह है कि इस स्टेज पर जिस ब्लॉकबस्टर भारत-ऑस्ट्रेलिया मुकाबले की उम्मीद की जा रही थी, वह कभी हुआ ही नहीं। श्रीलंका में ऑस्ट्रेलिया पर जिम्बाब्वे की चौंकाने वाली जीत ने ग्रुप के सारे समीकरण बदल दिए और क्वालिफिकेशन के गणित को नया रूप दे दिया।
दशकों से एमए चिदंबरम (MA Chidambaram) स्टेडियम का नाम स्पिन और धीमी पिचों के लिए जाना जाता रहा है। विदेशी टीमें अक्सर यहां धीमे और संघर्षपूर्ण खेल की तैयारी के साथ आती थीं। लेकिन इस टूर्नामेंट ने उस पुरानी कहानी को पूरी तरह से बदल दिया है।
इस वर्ल्ड कप के सभी वेन्यू में चेपॉक का बैटिंग औसत (32) सबसे ज्यादा है—जो दूसरे सबसे अच्छे वेन्यू अहमदाबाद से लगभग 8 रन अधिक है। इससे भी ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि यहां स्पिनरों का बॉलिंग औसत सबसे कम रहा है। यहां खेले गए अब तक के 6 मैचों में हर टीम ने 170 का आंकड़ा पार किया है। शाम के दो मुकाबलों में तो पहली पारी का स्कोर 200 और 196 रहा।
इस मैच के लिए चुनी गई काली मिट्टी (black-soil) की पिच से सही उछाल मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही एक बेहद तेज आउटफील्ड, बल्लेबाजों को उनके शॉट्स का पूरा इनाम देगी। ओस की भूमिका न के बराबर रहने की संभावना है और मौसम भी साफ रहने का अनुमान है।
भारतीय बल्लेबाजी क्रम, जो अन्य जगहों पर टर्निंग गेंदों के खिलाफ असहज दिखा है, उसके लिए वापसी करने का यह एक आदर्श मंच हो सकता है।
ऑफ-स्पिन के खिलाफ भारत का संघर्ष अब चर्चा का विषय बन चुका है। पांच मैचों में पार्ट-टाइम ऑफ-स्पिनर्स ने उनके खिलाफ 12 विकेट चटकाए हैं और लगातार उनके बाएं हाथ के बल्लेबाजों से भरे टॉप ऑर्डर को निशाना बनाया है।
ऐसे में टीम मैनेजमेंट कुछ बदलावों पर विचार कर रहा है:
- संजू सैमसन (Sanju Samson): टॉप ऑर्डर में दाएं हाथ के बल्लेबाजों का संतुलन बनाने के लिए वह ओपनिंग कर सकते हैं।
- अभिषेक शर्मा (Abhishek Sharma): उनके खराब फॉर्म ने सवाल तो खड़े किए हैं, लेकिन मैनेजमेंट इस शीर्ष टी20 इंटरनेशनल बल्लेबाज का फॉर्म में लौटने तक समर्थन करना जारी रख सकता है।
- ईशान किशन (Ishan Kishan): नंबर 3 के लिए एक बेहतरीन विकल्प हैं—इसी पोजिशन पर उन्होंने पिछले महीने न्यूजीलैंड के खिलाफ शतक जड़ा था।
- रिंकू सिंह (Rinku Singh): उनके खेलने पर संदेह है क्योंकि वह अपने बीमार पिता को देखने घर गए हुए हैं।
- तिलक वर्मा (Tilak Varma): वह फ्लोटर के रूप में खेल सकते हैं, जबकि सूर्यकुमार यादव (Suryakumar Yadav) का अपने अहम नंबर 4 स्थान पर बने रहना तय है।
- अक्षर पटेल (Axar Patel): ऑलराउंडर वॉशिंगटन सुंदर की जगह उप-कप्तान अक्षर पटेल को टीम में शामिल किए जाने की संभावना है, जिससे टीम को ज्यादा मजबूती मिलेगी।
जिम्बाब्वे की टीम चेन्नई में पूरे आत्मविश्वास के साथ पहुंची है। उनके इस अभियान में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एक बड़ा उलटफेर और कोलंबो में एक मजबूत प्रदर्शन पहले ही शामिल है। हालांकि, मुंबई में वेस्टइंडीज ने उन्हें 254 रन ठोककर 107 रनों की करारी शिकस्त दी और उन्हें वापस जमीन पर ला दिया।
चेपॉक की बाउंड्री मुंबई की तुलना में थोड़ी बड़ी और संतुलित है, जिससे उनके गेंदबाजों को कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन रन-फ्रेंडली पिच उनके सामने नई चुनौती पेश करेगी।
हाथ की चोट से पूरी तरह उबर चुके कप्तान सिकंदर रज़ा (Sikandar Raza) स्पिन और मिडिल-ऑर्डर दोनों की अहम जिम्मेदारी संभालेंगे। 6 फुट 8 इंच लंबे ब्लेसिंग मुजरबानी (Blessing Muzarabani) प्रैक्टिस के दौरान शानदार लय में दिखे और वह रिचर्ड नगारवा (Richard Ngarava) के साथ पेस अटैक की अगुवाई करेंगे। अनुभवी ग्रीम क्रेमर (Graeme Cremer) स्पिन विभाग में अपना तजुर्बा जोड़ेंगे।
ऑलराउंडर रयान बर्ल (Ryan Burl) ने ऑफ-स्पिन के खिलाफ भारत की कमजोरी को स्वीकार किया है और इशारा किया है कि जिम्बाब्वे उस कमजोरी पर वार करने के लिए तैयार है। यहां तक कि मुजरबानी ने नेट्स में ऑफ-कटर गेंदे भी ट्राई कीं।
सलामी बल्लेबाजी में ब्रायन बेनेट (Brian Bennett) की तकनीकी समझ और तादिवानाशे मारुमानी (Tadiwanashe Marumani) के बेखौफ शॉट्स का तालमेल शुरुआत में ही भारत को परेशान कर सकता है।
टी20 इंटरनेशनल में भारत और जिम्बाब्वे का सामना 13 बार हुआ है, जिसमें भारत ने 10 बार जीत दर्ज की है। लेकिन भारतीय सरजमीं पर यह उनकी पहली टी20 भिड़ंत होगी—और शायद अब तक की सबसे महत्वपूर्ण भी।
चेन्नई भले ही बाहर से ज्यादा शोर-शराबे वाला शहर न लगे, लेकिन स्टेडियम के अंदर जोश की कोई कमी नहीं होगी। चेपॉक के आस-पास की सड़कों पर भले ही बड़े-बड़े बैनर न दिखें, लेकिन जैसे ही गेट खुलेंगे, स्टेडियम नीले समंदर में तब्दील हो जाएगा।
भारत के लिए यह मुकाबला सिर्फ जीतने के बारे में नहीं है, बल्कि अपनी लय और क्वालिफिकेशन की उम्मीदों पर नियंत्रण पाने के बारे में भी है। हालात भारत के पक्ष में नजर आ रहे हैं और दर्शक भी पूरी तरह से टीम इंडिया का साथ देंगे। लेकिन अब गलती की कोई गुंजाइश नहीं बची है।
जिम्बाब्वे, जो इस टूर्नामेंट की स्क्रिप्ट में पहले ही एक बार फेरबदल कर चुका है, उसे यकीन होगा कि एक और बड़ा उलटफेर उसकी पहुंच में है।
चेपॉक की फ्लडलाइट्स में जब आखिरी गेंद फेंकी जाएगी, तब तक भारत के वर्ल्ड कप सफर को या तो एक नई जिंदगी मिल चुकी होगी—या फिर उसका अचानक अंत हो जाएगा।
