चंडीगढ़ कैट का फैसलाः नियमितीकरण आदेश की डेट से वरिष्ठता तय होगी तो लंबी सेवा का क्या महत्व, आयकर के स्टेनोग्राफर्स का केस
सेट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (कैट) चंडीगढ़ बेंच ने आयकर विभाग में कार्यरत 8 स्टेनोग्राफरों को राहत देते हुए उनकी सीनियोरिटी 2014 की बजाय 10 अप्रैल 2006 से तय करने के आदेश दिए हैं। ट्रिब्यूनल ने विभाग द्वारा जारी सीनियोरिटी सूची और संबंधित आदेशों को रद्द कर दिया।
जानिए पूरा मामला क्या था
अंजू बाला समेत 8 कर्मचारी 1993 से 1995 के बीच रोजगार कार्यालय के माध्यम से स्टेनोग्राफर पद पर नियुक्त हुए थे। वे नियमित स्वीकृत पदों पर लगातार 20 से अधिक वर्षों तक कार्यरत रहे।
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश के बाद विभाग ने 20 मई 2014 को उनकी सेवाएं नियमित कीं। विभाग ने उनकी सीनियोरिटी 21 मई 2014 से मानी, जिससे 2010 के बाद नियुक्त कर्मचारी उनसे वरिष्ठ हो गए।
कर्मचारियों ने इसे गलत बताते हुए कैट में याचिका दायर की। उनका कहना था कि उन्हें कम से कम 10 अप्रैल 2006 से नियमित माना जाना चाहिए और उसी आधार पर सीनियरिटी, पदोन्नति और अन्य लाभ दिए जाएं।
कैट ने माना कि कर्मचारी 20-25 वर्षों तक नियमित पदों पर लगातार काम करते रहे। केवल औपचारिक नियमितीकरण आदेश की तारीख से सीनियोरिटी तय करना अनुचित है। ट्रिब्यूनल ने कहा कि इस तरह की कार्रवाई से कर्मचारियों की लंबी सेवा का कोई महत्व नहीं रह जाएगा और बाद में नियुक्त लोग उनसे वरिष्ठ हो जाएंगे, जो कानूनन सही नहीं है।
9 नवंबर 2016 और 23 मई 2015 के आदेश रद्द कर दिए गए तथा 20 जनवरी 2016 की अंतिम सीनियोरिटी सूची को आंशिक रूप से निरस्त किया गया। कर्मचारियों की सीनियरिटी 10 अप्रैल 2006 से तय करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही स्टेनोग्राफर ग्रेड-I में पदोन्नति पर विचार करने और MACP सहित सभी वित्तीय लाभ देने के आदेश भी जारी किए गए हैं।
ट्रिब्यूनल ने विभाग को यह भी निर्देश दिया कि कर्मचारियों को पुरानी जीपीएफ-कम-पेंशन योजना का लाभ देने और पूर्व सेवा को पेंशन योग्य सेवा में जोड़ने के मुद्दे पर तीन माह के भीतर पुनः विचार कर कारणयुक्त आदेश जारी करें। ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया कि कर्मचारियों को उनकी लंबी और निरंतर सेवा का पूरा लाभ मिलना चाहिए।
