बिक्रम मजीठिया का आम आदमी पार्टी पर तीखा हमला, बोले- पंजाब के पानी पर दिल्ली से फैसले!

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शिरोमणि अकाली दल के सीनियर नेता बिक्रम मजीठिया की आज मोहाली कोर्ट में पेशी हुई। इस दौरान बिक्रम सिंह मजीठिया ने आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल और राज्यसभा सांसद सुशील गुप्ता पर सीधा हमला बोला है। मजीठिया का कहना है कि पंजाब के पानी से जुड़े फैसले दिल्ली में बैठे नेताओं के बयानों के आधार पर लिए जा रहे हैं, जो प्रदेश के हितों के खिलाफ है।

 

उन्होंने सवाल उठाया कि जब पंजाब पहले ही गंभीर जल संकट से जूझ रहा है, तो ऐसे समय में वॉटर कमीशन की टीम को प्रदेश में भेजने की क्या जरूरत है। मजीठिया ने आरोप लगाया कि यह कदम पंजाब के साथ अन्याय जैसा है। मजीठिया ने याद दिलाया कि पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के कार्यकाल में SYL से जुड़ी जमीन पहले ही लौटाई जा चुकी थी। इसके बावजूद दोबारा इस तरह की कार्रवाई करना पंजाब के लोगों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ है।

 

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी को लेकर भी मजीठिया ने तंज कसते हुए कहा कि वे खुद को पंजाब का भाई बताते हैं, लेकिन जल विवाद जैसे मुद्दों पर पंजाब के हितों को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पानी को लेकर पहले ही कई बार अध्ययन हो चुके हैं और नए सर्वे का कोई औचित्य नहीं बनता।

 

मजीठिया ने आरोप लगाया कि अरविंद केजरीवाल हरियाणा की राजनीति में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं और इसी मकसद से ऐसे फैसले लिए जा रहे हैं। हालांकि, उन्होंने दावा किया कि पंजाब की जनता अब सब समझ चुकी है और किसी भी तरह के बहकावे में आने वाली नहीं है। इसके साथ ही मजीठिया ने मौजूदा सरकार और पुलिस प्रशासन पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि जब सरकार और डीजीपी हालात संभालने में विफल हो जाते हैं, तब अदालतों को हस्तक्षेप करना पड़ता है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार हर स्तर पर असफल साबित हो रही है।

 

शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने जेल में अपने साथ कथित निगरानी को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। मजीठिया का कहना है कि जब वे जेल में बंद थे, उस दौरान उनकी निजी गतिविधियों पर भी कड़ी नजर रखी जा रही थी। उन्होंने दावा किया कि उनकी बैरक के आसपास कई कैमरे लगाए गए थे, जिनके जरिए हर पल की निगरानी की जा रही थी। मजीठिया ने आरोप लगाया कि उनकी गोपनीयता का उल्लंघन किया गया और यह जानने की कोशिश की जाती थी कि वे हर क्षण क्या कर रहे हैं।

 

मजीठिया ने इस पूरे मामले में पंजाब सरकार, डीजीपी गौरव यादव और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग की है। उनका कहना है कि जेल के भीतर इस तरह की निगरानी न केवल नियमों के खिलाफ है, बल्कि व्यक्तिगत अधिकारों का भी हनन है।

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