पंजाब में बारिश ने तोड़ा 70 साल का रिकॉर्ड, किसानों की पकी हुई फसल बर्बाद; अभी और कहर ढाएगा मौसम

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लुधियाना। पंजाब के कई जिलों में मंगलवार को हुई भारी वर्षा ने किसानों की चिंता फिर बढ़ा दी है। तेज हवा के साथ हुई वर्षा से पकी धान की फसल खेतों में बिछ गई है और मंडियों में पहुंचा अधिकांश धान भीग गया है। राज्य में अक्टूबर में वर्षा का 70 साल का रिकॉर्ड टूट गया है।

पिछले चौबीस घंटे में प्रदेश में 8.8 मिलीमीटर वर्षा हुई, जबकि सात अक्टूबर को सामान्यत: 0.2 मिमी वर्षा होती है। मौसम विभाग के मुताबिक 1955 से 2024 तक कभी सात अक्टूबर को इतनी वर्षा नहीं हुई। न ही अक्टूबर के पहले सप्ताह में किसी एक दिन इतनी वर्षा हुई है।

एक से सात अक्टूबर तक पंजाब में 20.7 मिमी वर्षा हो चुकी है, जबकि सामान्यत: 2.5 मिमी वर्षा होती है। यानी इस बार 727 प्रतिशत अधिक वर्षा हुई है। बुधवार को भी वर्षा की संभावना है।

उधर, हिमाचल प्रदेश में हो रही वर्षा के कारण बांधों का जलस्तर फिर से बढ़ गया है। इससे सतलुज, ब्यास और रावी के किनारे बसे क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।

मंगलवार को पौंग बांध का जलस्तर 1,384.57 फीट दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान (1,390 फीट) से मात्र 5.43 फीट नीचे है। 51 वर्षों में पहली बार अक्टूबर में पौंग बांध के सभी छह फ्लड गेट खोलने पड़े हैं।

फाजिल्का व फिरोजपुर में दो माह में तीसरी बार सतजुल का पानी खेतों में भर गया। फाजिल्का के गांव झंगड़ भैनी के परमजीत सिंह ने बताया कि धान की फसल फिर पानी में डूब गई। फिरोजपुर की डिप्टी कमिश्नर दीप शिखा शर्मा ने कहा कि स्थिति नियंत्रण में है।

वर्षा से 13 डिग्री सेल्सियस तक गिरा तापमान, ठंड का होने लगा अहसास: पंजाब में वर्षा से दिन और रात के तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई।

अधिकतम तापमान में 13 डिग्री सेल्सियस की गिरावट से ठंड महसूस होने लगी है। रूपनगर, होशियारपुर व नवांशहर में दिन का तापमान गिरकर 19 डिग्री सेल्सियस पर आ गया, जोकि सामान्य से 13 डिग्री सेल्सियस कम रहा। वहीं हिमाचल प्रदेश में हिमपात हुआ।

मुख्य कृषि अधिकारी डॉ. गुरदीप सिंह के अनुसार बेमौसम वर्षा से धान की फसल के भीगने से दाना बेरंग हो सकता है। कटाई पांच से छह दिन लेट हो सकती है। इसके साथ ही धान में नमी बढ़ जाएगी, जिससे मंडियों में किसानों को परेशानी आएगी।

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