नेपाल बाढ़ का खतरा टला, बैरियर झील का पानी निकला; 804 की मौत, 3000 लोग लापता
नेपाल बाढ़ से जूझ रहे नेपाल के लिए चीन की ओर से राहत की खबर सामने आई है। नेपाल-चीन सीमा के पास पिछले सप्ताह ग्लेशियर टूटने और बर्फ व चट्टानों के खिसकने के बाद बनी बैरियर झील का पानी अब प्राकृतिक बहाव के जरिए लगभग पूरी तरह निकल चुका है। चीन के जल संसाधन मंत्रालय ने रविवार को इसकी जानकारी दी। झील का पानी निकलने के बाद निचले इलाकों में अचानक बड़ी बाढ़ आने का खतरा काफी कम हो गया है।
इससे पहले विशेषज्ञों और अधिकारियों ने चेतावनी दी थी कि झील किसी भी समय फट सकती है। बताया गया था कि बैरियर के पीछे करीब 20 लाख घन मीटर पानी जमा हो गया था और पानी का स्तर लगातार बढ़ रहा था। ऐसे में झील के टूटने की स्थिति में नेपाल के निचले इलाकों में भारी तबाही की आशंका जताई गई थी।
नेपाल बाढ़ के बीच चीन से राहत की खबर आई है। बॉर्डर के पास बनी बैरियर झील का पानी प्राकृतिक रूप से निकल गया। बाढ़ और भूस्खलन में 804 लोगों की मौत और हजारों लोग लापता हैं।
नेपाल-चीन सीमा के पास बनी यह झील नेपाल की छोचेन खोला और चीन की पुरेपु त्सांगपो नदियों के संगम के नजदीक बनी थी। बुधवार को लांगटांग री के उत्तरी हिस्से में ग्लेशियर टूटने के बाद भारी मात्रा में मलबा और बर्फ नीचे की ओर आया। इसके कारण नदी का प्राकृतिक प्रवाह बाधित हुआ और वहां बैरियर झील का निर्माण हो गया।
चीन के जल संसाधन मंत्रालय की हाइड्रोलॉजिकल इमरजेंसी मॉनिटरिंग टीम ने बताया कि अब पानी प्राकृतिक रास्तों से सामान्य रूप से बह रहा है। जमा हुआ पानी भी लगभग पूरी तरह निकल चुका है। इससे इस क्षेत्र में झील के अचानक टूटने से आने वाली बाढ़ का तत्काल खतरा कम हुआ है।
चेंगदू स्थित चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंसेज में कार्यरत नेपाली वैज्ञानिक नितेश खड़का ने भी अपने साथियों से मिली तस्वीरें साझा की हैं। तस्वीरों में निचली बैरियर झील का पानी निकलता हुआ दिखाई दे रहा है। वैज्ञानिक के अनुसार, ऊपरी झील का भी आधे से अधिक पानी बह चुका है।
हालांकि विशेषज्ञों की नजर अभी भी पूरे नदी तंत्र पर बनी हुई है, क्योंकि नेपाल के कई हिस्से पहले से ही भीषण बाढ़ और भूस्खलन की चपेट में हैं।
बैरियर झील का खतरा कम होने के बावजूद नेपाल में बाढ़ की स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है। रविवार को भोटेकोशी और त्रिशूली नदी सिस्टम में पानी का स्तर फिर बढ़ गया। इससे उन क्षेत्रों में चिंता बढ़ गई, जो कुछ दिन पहले आई विनाशकारी बाढ़ से पहले ही बुरी तरह प्रभावित हो चुके हैं।
उफान पर चल रही त्रिशूली नदी ने नुवाकोट और धाडिंग जिलों में नदी के किनारों पर कटाव तेज कर दिया है। बाढ़ के कारण हुए कटाव और इसके बाद धाडिंग के कृष्णभीर में हुए भूस्खलन ने पृथ्वी हाईवे के मुग्लिन-काठमांडू सेक्शन को पूरी तरह बंद कर दिया है।
रविवार को बाढ़ के तेज बहाव ने त्रिशूली नदी पर बने एक सस्पेंशन ब्रिज को भी बहा दिया। यह पुल गोरखा के घ्याचोक को धाडिंग के चाराउडी से जोड़ता था। पुल के बह जाने से स्थानीय लोगों के आवागमन और राहत एवं बचाव कार्यों के सामने भी चुनौतियां बढ़ गई हैं।
नेपाल में अचानक आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस प्राकृतिक आपदा में मरने वालों की संख्या बढ़कर 804 हो गई है, जबकि करीब 3000 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।
बचाव दल कीचड़, मलबे और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लगातार अभियान चला रहे हैं। कई स्थानों पर सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त होने के कारण राहत सामग्री पहुंचाना और लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, करीब 2498 लोग अभी भी लापता हैं। इनमें 933 जलविद्युत कर्मचारी, 589 विदेशी नागरिक और विदेशी पर्यटकों के साथ यात्रा कर रहे 127 नेपाली नागरिक शामिल बताए गए हैं।
नेपाल सरकार ने राहत एवं बचाव कार्यों के लिए करीब 20 हजार सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया है। प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को हेलिकॉप्टरों की मदद से सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।
बचावकर्मी मलबे और कीचड़ में जीवित बचे लोगों की तलाश कर रहे हैं। खराब मौसम, क्षतिग्रस्त सड़कों और भूस्खलन के खतरे के बावजूद राहत कार्य जारी हैं।
फिलहाल बैरियर झील का पानी प्राकृतिक रूप से निकल जाना नेपाल के लिए एक बड़ी राहत माना जा रहा है। हालांकि नेपाल बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों में नदियों के जलस्तर, भूस्खलन और क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे के कारण खतरा अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
