जम्मू-कश्मीर में पांच दिन में 80 मौत, कुपवाड़ा के बाद कठुआ बरपा कहर; भारी बारिश का अलर्ट

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जम्मू-कश्मीर में बादल फटने की घटनाएं लगतार हो रही हैं। सोमवार को कुपवाड़ा के लोलाब और कठुआ जिले के बनी क्षेत्र में बादल फटे। इसमें जानमाल का नुकसान नहीं हुआ, लेकिन क्षेत्रों में भारी मलबा जमा हो गया है।

प्रदेश के कई हिस्सों में सुबह से दोपहर तक रुक-रुक बारिश होती रही। दक्षिण कश्मीर को जम्मू से जोड़ने वाले मरगन-सिंथनटाप मार्ग भी बंद रहा। वहीं मौसम को देख जम्मू संभाग के सभी शिक्षण संस्थानों में 19 अगस्त को भी अवकाश घोषित किया है।

मौसम विभाग ने मंगलवार को मध्यम से भारी बारिश की चेतावनी दी है। नदी-नालों के पास व भूस्खलन वाले इलाकों से लोगों को दूर रहने की सलाह दी है।

सभी जिलों में आपदा नियंत्रण कक्ष, हेल्पलाइन सेवाएं शुरू की हैं। कुपवाड़ा जिले में लोलाब के वारनोव जंगल में सुबह बादल फटने के बाद बाढ़ से नुकसान पहुंचा है। कई पेड़ गिर गए, पानी जमा हो गया है।

जंगल से सटे रिहायशी क्षेत्र में लोगों को सतर्क किया गया है। हालांकि, बाढ़ का पानी वहां तक नहीं पहुंचा है। वन संपदा को नुकसान पहुंचा है। प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग की टीमें जायजा ले रही हैं। कठुआ जिले के पहाड़ी क्षेत्र बनी के खावल में तड़के बादल फटा।

वहां से आबादी 500 मीटर दूर थी। बादल फटने के बाद पानी खाद नाले में चला गया। उत्तर-पूर्वी कश्मीर के सोनमर्ग और पहलगाम में अमरनाथ गुफा और उसके आसपास क्षेत्रों में सोमवार को इस मौसम की पहली बर्फबारी हुई। घाटी में बारिश ने कश्मीर में तापमान को गिरा दिया।

कश्मीर के प्रवेश द्वार काजागुंड में सबसे अधिक 25 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई। इसके बाद कोकरनाग में 19 मिमी वर्षा हुई। जम्मू-कश्मीर की ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर में 5:30 बजे तक 17.2 मिमी, प्रसिद्ध स्की रिसार्ट गुलमर्ग में 16.4 मिमी वर्षा हुई।

मौसम विभाग ने ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बादल फटना, निचले इलाकों में बाढ़, पहाड़ी और पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन, जम्मू-श्रीनगर हाईवे, बटोत-डोडा-किश्तवाड़ और जम्मू-राजौरी-पुंछ राजमार्ग के संवेदनशील हिस्सों में बारिश के दौरान चट्टानों के खिसकने की चेतावनी दी।

आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार सरकार ने सभी उपायुक्तों, पुलिस, और इंजीनियरों के साथ संबंधित कर्मचारियों को आपातस्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने का निर्देश दिया है।

पुलिस व एसडीआरएफ को भी अलर्ट पर रखा है। सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग को नदियों, नहरों और जलाशयों पर 24 घंटे निगरानी रखने का निर्देश दिया है। यात्रियों, पर्यटकों को भारी वर्षा के दौरान पहाड़ी सड़कों से बचते हुए यात्रा की योजना बनाने की हिदायत दी है।

बता दें कि 14 अगस्त को किश्तवाड़ के चशोती में बादल फटने से 63, 17 अगस्त को कठुआ में सात की मौत हुई है। बाढ़ से लामायूरु मार्ग बंद लद्दाख जिले के खंगराल में पांच दिन पहले बादल फटने से बाढ़ में श्रीनगर-लेह राजमार्ग के लामायूरु मार्ग बंद है। खाद्य सामग्री लिए कई वाहन फंसे हैं। सड़क को हल्के मोटर वाहनों के लिए आंशिक खोला है, लेकिन ट्रकों को अनुमति नहीं है।

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