चंडीगढ़ परियोजना निदेशक 75 करोड़ रुपये के सरकारी खजाने के घोटाले में गिरफ्तार

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चंडीगढ़ पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने रिन्यूएबल एनर्जी एंड साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रमोशन सोसाइटी (सीआरईएसटी) में हुए लगभग 75 करोड़ रुपये के घोटाले में बड़ी सफलता हासिल करते हुए परियोजना निदेशक सुखविंदर सिंह अब्रोल को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी को रविवार को ड्यूटी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया, जहां से उसे 5 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। सीआरईएसटी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) की शिकायत पर 12 मार्च, 2026 को मामला दर्ज किया गया था। जांच के दौरान पता चला कि करोड़ों रुपये सरकारी खातों से फर्जी (शेल) कंपनियों के खातों में स्थानांतरित किए गए थे। बाद में यह राशि आरोपी अब्रोल और उसके करीबी सहयोगियों के निजी खातों में ट्रांसफर कर दी गई। संदेह है कि इस घोटाले में शामिल अधिकारियों और उनके परिवारों को करोड़ों रुपये नकद भी दिए गए थे। जांच में नगर निगम के तत्कालीन मुख्य अभियंता एन. पी. शर्मा और स्मार्ट सिटी परियोजना की लेखा अधिकारी नलिनी मलिक के नाम भी शामिल हैं। आरोप है कि फर्जी खाते उनके निर्देश पर खोले गए थे। नलिनी मलिक को गिरफ्तार करने के लिए पुलिस टीम ने करनाल में छापा मारा, लेकिन पुलिस के पहुंचने से पहले ही वह फरार हो गईं। पुलिस को करनाल में एक घर के बाहर एक XUV वाहन मिला है, जिसके नलिनी मलिक का होने का संदेह है। डीजीपी डॉ. सागर प्रीत हुड्डा ने 75 करोड़ रुपये के क्रेस्ट घोटाले और नगर निगम के 116.84 करोड़ रुपये के फर्जी एफडी घोटाले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। इस दल में दो आईपीएस अधिकारियों को भी शामिल किया गया है। पुलिस के अनुसार, अब्रोल से रिमांड के दौरान पूछताछ में कई और बड़े खुलासे होने की संभावना है।

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